तब्लीगी जमात के साथ दूसरे धार्मिक स्थलों की स्तिथि को भी देखो।

अगर बात हो तो बराबर की होनी चाहिए, ऐसे किसी समुदाय विशेष को दोष देना हिंदुस्तान की संस्कृति में नहीं सिखाया जाता।

आज के इस मुश्किल दौर में जहाँ पूरा देश कोरोना जैसी विपदा से जूझ रहा है वहीँ दूसरी तरफ कुछ सियासी लोग अपनी सियासत चमकाने में लगे हुए हैं, आज एक समझदार ज़हन यह सोचेगा की पुरे देश को एक साथ मिल कर इस विपदा से निपटना चाहिए ।

फिर चाहे वो मुस्लिम हो, हिन्दू हो या फिर ईसाई हो। इस वक़्त हम सब सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तानी हैं और अगर हमने इस एकता की सोच पर अमल कर लिया तो निश्चित तौर पर हम जीत जाएंगे। मगर आज हो क्या रहा है, जिसे देखो वो ही इन राजनैतिक पार्टियों की राजनीति पर बिना सोचे समझे टिप्पणियां कर रहा है ।
कोई भी अपना दिमाग इस्तेमाल कर के ये सोचने की ज़हमत नहीं उठा रहा है की जिन मुद्दों को कुछ राजनेता सिर्फ अपनी राजनीती के लिए उठा रहे हैं उनमे हमारा कुछ भला नहीं है बल्कि सच तो यह है की वो धर्म को ढाल बना कर अपना वोट बैंक बना रहे हैं और इस से हम लोगो में आपस में फूट पड़ रही हैं ।
अब हमारे मुस्लिम भाई अपनी तब्लीगी जमात लेकर अपने बच्चो में दीनी अख़लाक़ को सिखाने जगहे जगहे जाते हैं तो अब इस पर भी राजनीती हो रही है, जमात को ऐसे पेश किया जा रहा है की जैसे वहां आतंकवादी बनाने की सीख दी जाती हो ।
दूसरी तरफ इनके ऊपर यह इलज़ाम लगाया जा रहा है की ये कोरोना जैसी बीमारी को फैला रहे हैं। अरे मुस्लिम उलेमा तो जगहे जगहे यह बयां जारी कर रहे हैं की मस्जिदों में मत इकठा हों, कुछ समय के लिए जमातों से बचें ।
मगर कुछ लोग लॉक डाउन से पहले जमात में गए थे तो वह लोग वहां फंस गए इसका मतलब यह तो बिलकुल नहीं की वो जान बूझ के वहां छुपे रहे, क्या उनको अपनी जानो की परवाह नहीं है।
ऐसे तो माँ वैष्णो देवी मंदिर, शिरडी साईं, शनि शिगनापुर, तिरुपति बालाजी जैसे मंदिर भी काफी समय तक खुले रहे और लाखों की संख्या में लोग वहां जमा हुए जिनमे से बहुत से लोग दूसरे देश के भी थे मगर उनपर तो किसी ने सवाल नहीं उठाया, क्यूंकि वो हिन्दू समाज के लोग थे और यह देश हिंदुस्तान है सिर्फ इसलिए ?

vashno devi mandir crowd in lockdown

अगर ऐसा है तो सच में यहाँ के लोग अपना सारा विवेक खो चुके हैं और यहाँ के राजनेता इनको भेड़ो की तरहे जहाँ चाहेअपने हित के लिए अपनी मर्जी से मोड़ सकते हैं।
बस कुछ मुस्लिम विरोधी हिन्दुओं को मुस्लिमो के खिलाफ छोटी सी बात पे भड़का दो और कुछ हिन्दू विरोधी मुस्लिमो को छोटी सी बात से भड़का दो और आराम से बैठ के तमाशा देखो, ऐसे में उनका वोट बैंक तो बढ़ रहा होता है मगर भाइयों जैसे देशवासियों में दूरियां बढ़ती जाती हैं।
तो भईयों जरा अपना दिमाग इस्तमाल करो और समझो इस खेल को और दिखा दो इनको की अब हम तुम्हारी चालाकियों को समझ चुके हैं और अब बेवकूफ बन कर आपस में नहीं लड़ेंगे, हम सब एक देश के वासी हैं और हमे धर्मो में मत बांटो।
अगर ये सोच सब की बन गई तब दिखना ये देश किन ऊंचाइयों पर पहुँचता है

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